Saturday, August 23, 2008

अकेला चला था .....

अकेला चला था
अकेला रुका था
जीवन के डगर मे
अकेला ही बढ़ा था ,

न साथ देना कोए चाहां ,
न हाथ बढाया
न ही किसने हस कर मुस्कराया
हमने सरीफ अपने साये के सहारे
जीवन की इस मंजिल को पाया ........

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